उफ्फ.........ये कैसी कहानी Part -1

 काॅफ़ी  की पहली सिप लेते हुए ..अचानक उसकी निगाह 
 ऊपर की तरफ मुड़ी ...दो नजरें मिली ,और कुछ पल के लिए 
दोनों एक दूसरे को देखते  ही रहे ....और शायद दोनों एक दूसरे 
के लिए पेसमेकर (दिल की गति को बढ़ाने वाला यन्त्र ) का काम कर रहे थे
प्रेम अपने शुरआती दिनों में उस जिद्दी बालक की तरह होता है 
जो  खिलौने को किसी भी कीमत पर अपना लेना चाहता है .मेरी इस कहानी 
 में वही भूमिका है जो महाभारत में संजय की थी ...ये कहानी 
शुरू होती है दिल्ली के बड़े से रेस्त्रां से ....अन्य दिनों की तरह सूरज आज
फिर अपने दोस्तों के साथ कॉफ़ी पीने आ गया था और साथ में थी ..वही 
उसकी जान "सिगरेट की छोटी सी पैकेट".. आलोकधन्वा ने एक बार कहा 
था की जब दुनिया में किसी ने मेरा साथ नहीं दिया तब दो रुपये की सस्ती सिगरेट 
ने मेरा साथ दिया ,सूरज भी खुद में अकेला ..खुद से जूझता हुआ एक अय्याश लड़का था 
 उसमें बहुत सारी ऐब होने के बावजूद उसके दोस्तों की संख्या काफी थी 
,किसी ने क्या खूब कहा है...........
                    '' जिनके आँगन में अमीरी का शज़र लगता है
                       उनका हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है.....''
 अपने इन्ही दोस्तों के बीच खुद में अकेला सूरज कुछ खोया -खोया सा रहता था 
.मानों हर वक़्त ..हर पल ... उसकी निगाहें  किसी खास चीज़ की तलाश कर रही हो 
पापा बहुत बड़े बिज़नेस मैन थे ..घर में किसी चीज़ की कमी नहीं थी..यहाँ तक की उसके साथ 
हमेशा एक सुरक्षा गार्ड भी होता था ..फिर भी इन सभी चीज़ों में अगर किसी बात की कमी थी 
तो वो थी प्यार की ..मोहब्बत की..शायद  उसकी आँखें इसी खास चीज़ की तलाश कर रही थी 
आज का दिन उसके लिए काफी खुशनुमा  था ..काॅफ़ी की पहली सिप लेते हुए उसकी निगाह काउंटर 
पर खड़ी  रिसेप्शनिस्ट की तरफ गयी ..दोनों एक दूसरे को देखते ही रहे .. ऐसा लगा जैसे कोई पुरानी याद हो 
जो भी हो ..ये एक पल का प्यार दोनों के दिलों  में एक कशक छोड़ गया  था , इधर कॉफ़ी समाप्त हो चुकी थी ...
वो वापस घर लौट चूका था ...आज उसकी नींद गायब  थी..हर बार उसको वो निगाहें याद आ रही थी ..
प्यार की पहली नजर क्या होती है ..ये  तो वही जाने जिसने कभी सच्चा प्यार किया हो  ...
ये रात उसके लिए काफी भयानक थी  उधर बैकग्राउंड में पाकीज़ा मूवी का वो प्रसिद्ध गाना
                           "आज की रात बचेंगे ,तो सहर (सुबह ) देखेंगे '' 
एक धीमी सी आवाज में बज रहा था ..इधर सूर्य ने अंधेरों को अपने आगोश में लिया और फिर एक सुबह हुई ..दिन ढलने के बाद सूरज फिर उस कॉफ़ी टेबल पर जा पहुंचा था .पर आज उसे काॅफ़ी पीना नहीं ..किसी खास का इंतज़ार था ,पर ये क्या 
आज तो रिसेप्शन काउंटर पर कोई और था..एक पल में उसके दिल में एक तूफ़ान सा उठ चूका था  ......  ....क्या दोनों का ये प्यार 
अंजाम तक पहुँच पायेगा ..या फिर इस कहानी का भी अंत बुरा होगा ..कौन थी वो रिसेप्शनिस्ट 
जानने के लिए बस थोड़ा सा इंतज़ार कीजिये .....फिर  मिलते हैं अगले भाग में ..........................By chandan kumar
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