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प्यार को एक मंजिल तक क्यों पहुँचाना चाहते हो .....?

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एक दिन ऐसे ही फेसबुक की गलियों में वो मुझे मिल गई थी ,मेरे किसी कविता  पर कुछ कमेंट था उसका, उस वक़्त पता नहीं मेरे दिमाग में क्या चल रहा था मैंने एक आर्टिकल का लिंक भेजा था उसे पढने के लिए , लिंक भेजकर मैं भूल चूका था सब कुछ लेकिन अचानक एक दिन महीनों बाद एक मैसेज आया था उसका ,आर्टिकल की काफी तारीफ़ कर रही थी ,बस उस वक्त कुछ बाते हुई...... फिर एक दिन उसने मेरा नंबर लिया था ,उसके बाद तो बस एक  कहानी  है , काफी दिन बीतने के बाद बातों ही बातों में उसने कहा की तुम काफी छोटे हो मुझसे , पर शायद  मैंने इस पंक्ति को अनसुना कर दिया था क्योंकि ये मेरे लिए कोई नई बात नहीं थी ,ये पंक्ति कई बार मेरे कानो तक पहुच चुकी थी ,वैसे भी उम्र मेरे लिए लिए कुछ ख़ास मायने नहीं रखती थी | उसके हर छोटी सी छोटी बातों को मैं सुनता जा रहा था ,काफी कुछ कहना चाहती थी और कहा भी उसने ,मुझे जल्दी ही उसके अन्दर एक अधूरापन नजर आ गया था ,एक गुस्सा ,एक दर्द ,एक आह ...सब कुछ देख रहा था उसमे , फिर भी बड़े शांत होकर उसे सुने जा रहा था | इन सब के बीच उसका प्यार करना ,मेरी हर बातों को सुनना , सबकुछ बेहद अ...

एहसास ....

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एक ऐसी रात है...जब तुम मुझे बेहद याद आ रही हो..दिल कर रहा है तुम्हे कसकर अपने बाँहों में थाम लूँ...तुम मुझसे इतनी दूर हो..फिर भी ऐसा लग रहा है कि तुम मुझसे कभी अलग ही नही हुई ..मानो रूह के किसी कोने में चिपक कर बैठी हुई हो....ये अप्रैल और मई की ही तो बात थी जब तुम पिछले साल चुपके चुपके दिल में दस्तक दिए जा रही थी..उस वक़्त मुझे काफी हँसी आ रही थी, और हाँ काफी खुश भी था मैं..जैसे लगा दिल को कोई ख़ास चाहने वाली चीज़ मिल गई हो और शायद मुकद्दर चिल्ला चिल्ला कर कह रहा हो कि ..दोस्त तुम्हें मैं "जिंदगी " दे रहा हूँ ..मोहब्बत के एहसास को पिरोने के लिए किसी ने तीन शब्द बना दिए थे , पर उन लफ़्ज़ों से भी आगे निकल गयी थी हमारी कहानी । वो कितना खूबसूरत पल होता है जब आपके दिन की शुरआत किसी ख़ास आवाज से होती है...जब तुम मुझे अपनी प्यारी आवाज़ से जगाती थीं तो दिल करता था कि दुनिया की सारी मोहब्बत तुम पर उड़ेल दूँ, घर से दूर रह रहे किसी अजनबी से उसका हाल जानना,उसे प्यार करना ,डांटना,समझाना..ये छोटी छोटी बातें कुछ लोगों के लिए कितना मायने रखताहै ये तुम कभी नहीं समझ पाओगी ...दोस्त, जिंदगी में इतने ...

बापू ....तेरी बिटिया अब चुप हो गयी है

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माथे पर पसीने की बूंदे चमक रही थी ,  अपने सर पर बोझा  लिए वो बहुत तेजी से सड़क पार कर रही थी ,प्रकृति  ने मानो सारी खूबसूरती  उसपर उड़ेल दी हो , गीत गुनगुनाते हुए बड़ी  मस्ती से वो  दुनिया से अनजान चली जा रही थी .... तभी  पीछे  से किसी ने उसे बड़ी जोर से डांटा ,अगर मजदूरी चाहिए तो जल्दी जल्दी काम करो ....ऐसे  गाने  से काम नहीं चलेगा  , वो बस उसे देखते ही रह गयी  ...शायद कह रही  हो कमबख्त इस धुप में खुद बोझ उठाकर तो देखो  .. बापू ने बड़े प्यार से उसका नाम लक्ष्मी रखा था , जिसे मुहल्लेवालों ने लछमिनया कहना शुरू कर दिया था , जन्म के साथ ही सब लोग काफी खुश थे ,बिटिया काफी सुन्दर हुई थी और इधर मुखिया जी ने भी उसके बापू को  अपने यहाँ काम दे दिया था और उसने पूरे मोहल्ले में मिठाई बांटी थी \  दिन बीतता गया और कब लक्ष्मी अपने यौवनावस्था  में आ गयी थी पता ही नहीं चला  इधर  सोचते सोचते लक्ष्मी भी  बोझा  लेकर मुखिया जी के घर पहुँच गयी और बोझ पटकते हुए , मुंशी जी से मजदूरी लेकर चली गयी | ...

अधूरी कहानी .....

-सुनो ना ...तुमसे एक बात कहनी थी  । -हाँ बताओ -अच्छा तुम्हारी स्टडी कैसी चल रही है ? -हम्म ...सही चल रही है वैसे तुम ये तो नही पूछने वाले थे , जो कहना चाहते हो वो भी बता दो अब, -नहीं नहीं ..मु...