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बापू ....तेरी बिटिया अब चुप हो गयी है

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माथे पर पसीने की बूंदे चमक रही थी ,  अपने सर पर बोझा  लिए वो बहुत तेजी से सड़क पार कर रही थी ,प्रकृति  ने मानो सारी खूबसूरती  उसपर उड़ेल दी हो , गीत गुनगुनाते हुए बड़ी  मस्ती से वो  दुनिया से अनजान चली जा रही थी .... तभी  पीछे  से किसी ने उसे बड़ी जोर से डांटा ,अगर मजदूरी चाहिए तो जल्दी जल्दी काम करो ....ऐसे  गाने  से काम नहीं चलेगा  , वो बस उसे देखते ही रह गयी  ...शायद कह रही  हो कमबख्त इस धुप में खुद बोझ उठाकर तो देखो  .. बापू ने बड़े प्यार से उसका नाम लक्ष्मी रखा था , जिसे मुहल्लेवालों ने लछमिनया कहना शुरू कर दिया था , जन्म के साथ ही सब लोग काफी खुश थे ,बिटिया काफी सुन्दर हुई थी और इधर मुखिया जी ने भी उसके बापू को  अपने यहाँ काम दे दिया था और उसने पूरे मोहल्ले में मिठाई बांटी थी \  दिन बीतता गया और कब लक्ष्मी अपने यौवनावस्था  में आ गयी थी पता ही नहीं चला  इधर  सोचते सोचते लक्ष्मी भी  बोझा  लेकर मुखिया जी के घर पहुँच गयी और बोझ पटकते हुए , मुंशी जी से मजदूरी लेकर चली गयी | ...

अधूरी कहानी .....

-सुनो ना ...तुमसे एक बात कहनी थी  । -हाँ बताओ -अच्छा तुम्हारी स्टडी कैसी चल रही है ? -हम्म ...सही चल रही है वैसे तुम ये तो नही पूछने वाले थे , जो कहना चाहते हो वो भी बता दो अब, -नहीं नहीं ..मु...