''तुम्हे लिखे बिना मैं मौत को भी अपने पास नहीं आने दूंगा''

कई दिनों से तुम्हे लिखने को सोच रहा हूँ ...पर कलम साथ नहीं दे रही 
मेरे महबूब .....मेरे दिलनशी ....मेरी जिंदगी ..तुम उदास मत होना 
मैं फिर भी लिखूंगा तुझे ....क्यूंकि तुम्हे सबसे खूबसूरती से मैं ही 
लिख सकता हूँ ....मैं ही तुम्हारे हसीं होठों के पीछे, छुपे अनकहे बातों 
को लिख सकता हूँ | मैं लिख सकता हूँ तुम्हारी आँखों में छुपे बेचैनियों 
को ...तुम्हारे खिलखिलाते हुए चेहरे के पीछे छुपी उदासियों को मैं ही
लिख सकता हूँ | मेरे हमदोस्त मैंने काफी पढ़ा है तुझे ...
तुम्हारे जिंदगी के हर एक आह को लिख सकता हूँ मैं
हाँ मैं ही वो हूँ ...जिसके शब्दों में तुम अब भी खुद को खोजती हो
और कभी हँस लेती हो तो कभी रो लेती हो ...और कभी कभी तो
अपने दोस्तों को भी सुना देती हो .......पर शायद अब मुझे पता नही की
मैं कब तक लिख पाउँगा ..क्यूंकि जिए हुए को पुनः जीना काफी कठिन होता है
कभी सोचा है तुमने ,मैं ये सब कैसे कर पाता हूँ ? ... किसी से सुना था प्यार के बारे में
और जिस खूबसूरती से उसने बताया था इसको ....इतना तो कह ही सकता हूँ
की ये भी है एक प्यार की छोटी सी कहानी ...और तुम ही हो इस कहानी की आत्मा
और मेरा तुमसे वादा है....''तुम्हे लिखे बिना मैं मौत को भी अपने पास नहीं आने दूंगा''

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