मैं लोकतंत्र हुं

मैं लोकतंत्र हुं , सिसकता ,सुबकता ,बिलखता
तड़पता , मैं मौनतंत्र हूँ ,मैं लोकतंत्र हूँ
गरीबों कि आवाज दबा मैं ,अमीरों कि आवाज बना मैं
खुद पर शर्मिंदा , मैं एक शर्मतंत्र हूँ ,मैं लोकतंत्र हूँ
नेताओं का निजतंत्र बना मैं ,पूंजीपतियों का षड़यंत्र बना मैं
अपने ही बेटों का गला दबाता,मैं एक यमतंत्र हूँ ,मैं लोकतंत्र हूँ
घोटालों का सुतंत्र बना मैं ,अबलाओं का कुतंत्र बना मैं
अश्रु बहाता खुद के भाग्य पर ,मैं एक भ्रष्टतंत्र हूँ ,मैं लोकतंत्र हूँ
ईमानदारों का परतंत्र बना मैं ,बेईमानों का स्वतंत्र बना मैं
बन मूक,देखता सब चीजों को ,मैं एक मजबूर तंत्र हूँ ,मैं लोकतंत्र हूँ
पर  यह सब  क्या  मेरी गलती है ?
अपने ही  बेटो ने मेरा यह हाल किया है
जो हसतां था राजतन्त्र पर ,उसका हाल बेहाल किया है ,
आवाह्न करता फिर भी ,अपनों से, मैं एक बेशर्म तंत्र हूँ ,मैं लोकतंत्र हूँ
उठो जागों !ऐ देश के युवा सपूतों ,अब की बारी तुम्हारी है
इस बार अगर तुम चुक गए ,तो यह हार तुम्हारी है _

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