मेरे अश्क
मेरे अश्क ही अक्सर मेरे राजों को खोल देती है
रात खामोशी में बीती ,सुबह तकिया बोल देती है
रात खामोशी में बीती ,सुबह तकिया बोल देती है
मेरे अल्फाजों को ग़मों का समंदर मत समझना,
अक्सर जहाँ प्यार रूठा हो निगाहें बोल देती हैं
अक्सर जहाँ प्यार रूठा हो निगाहें बोल देती हैं
यूँ कब तक छुपाओगे ख़ताओं को ज़माने से,
जहाँ हुस्न बिकता हो ,महफ़िलें बोल देती हैं
जहाँ हुस्न बिकता हो ,महफ़िलें बोल देती हैं
मैं तो मिल भी लेता हूँ उनसे रातों के ख़्वाबों में,
उनका क्या? जिनकी नींदे मोहब्बत छीन लेती है
उनका क्या? जिनकी नींदे मोहब्बत छीन लेती है
इस शहर कहीं वफाओं की तलाश मत करना,
जहाँ प्यार मरता है अक्सर फिजायें बोल देती है
जहाँ प्यार मरता है अक्सर फिजायें बोल देती है
अब वो मोहब्बत में मुझे और कितना सतायेगी,
सुना है दीवानों को अक्सर जुदाई तोड़ देती है।
सुना है दीवानों को अक्सर जुदाई तोड़ देती है।
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