सबब तुम ही क्यों होते ,हर कुछ हार जाने का...........?
कभी सीता जलाते हो , कभी गीता जलाते हो
सबब तुम ही होते हो,सियासत के मुस्कुराने का
सबब तुम ही होते हो,सियासत के मुस्कुराने का
कभी रिश्वत कमाते हो ,कभी कुर्सी बचाते हो
सबब तुम ही होते हो ,चोरों के खिलखिलाने का
सबब तुम ही होते हो ,चोरों के खिलखिलाने का
कभी अपने बचाते हो , कभी दूजे सताते हो
सबब तुम ही होते हो ,मासूमों के बिलबिलाने का
कभी सपने दिखाते हो , कभी वेश्या बनाते हो
सबब तुम ही होते हो ,आंसुओं के रूठ जाने का
सबब तुम ही होते हो ,आंसुओं के रूठ जाने का
कभी हिन्दू बनाते हो , कभी मुस्लिम बनाते हो
सबब तुम ही क्यों होते ? हर कुछ हार जाने का
सबब तुम ही क्यों होते ? हर कुछ हार जाने का
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