नसीब

हम वफाओं से डरते हैं, तुम जफ़ाओं कि बात करते हो
हम अदाओं से डरतें हैं ,तुम सजाओं कि बात करते हो
वो बीते लम्हों कि बात थी जब सब दौर में  कुछ अपना था
हमें तो दोस्तों ने रुलाया हैं, तुम दुश्मनों कि बात करते हो
यहाँ तो बसंत में पत्ते गिर गए ,तुम पतझर कि बात करते हो
अब तो  आँखें रूठ गयी मुझसे ,तुम सोने कि बात करते हो
मैं  निगाहें मिलाने से डरता हुं,तुम निगाहें चुराने कि बात करते हो
मैं किसी को पाने से डरता हुं ,तुम किसी के खोने कि बात करते हो
सारा जमाना ही यही हैं" चन्दन"तुम भी ना जाने क्या बात करते हो
यहाँ तो प्यार में वो मुझसे रूठ गए, तुम नफ़रत कि बात करते हो .........

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