मेरे शब्द

''मेरे शब्द'' तुम कहाँ खो गए ?
ना जानें तुम कहाँ सो गए ?
मेरी तलवार कहाने वाले 
उनकी ललकार दबाने वाले 
मुझे अपनी पहचान दिलाने वाले 
''मेरे शब्द'' तुम कहाँ खो गए ?
ना जानें तुम कहाँ सो गए ?
रूठों को मनाने वाले
अपनों को बनाने वाले
''मेरी मधुशाला'' सजानें वाले
''मेरे शब्द'' तुम कहाँ खो गए ?
ना जानें तुम कहाँ सो गए ?
मुझे प्यारे ज़ख्म दिलाने वाले
नित नए गीत सुनाने वाले
अब मैं किस पर नाज़ करूँ?
मेरे शब्द अब मैं किस पर साज करूँ?
बुझी शमां जलाने वाले ....''मेरे प्यारे शब्द''
अपने कुछ जज्बातों को अब मैं यहीं सुलाता हूँ
क्रन्द वेदना की इस बेला में,आज तुम्हें जगाता हूँ
आओ ..''मेरे शब्द '' मैं फिर से तुम्हे बुलाता हूँ

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